Saturday, May 22, 2010

कुछ पसंदीदा शेर......

कल और आयेंगे नगमों की खिलती कलियाँ चुनने वाले
मुझ से बेहतर कहने वाले तुमसे बेहतर सुनने वाले ….
क्यों कोई मुझको याद करे , क्यों कोई मुझको याद करे
मसरूफ ज़माना फिर मुझ पर क्यों वक़्त अपना बर्बाद करे...

हम भी दरिया हैं,
हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे
रास्ता हो जायेगा

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुँजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिन्दा न हों ।

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलानें में ।

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये ।

कौन पूछता है पिंजरे में बंद इन पंछियों को,
याद वोह ही आते हैं जो उड़ जाते हैं।


मोहब्बत में वफादारी से बचिए
जहाँ तक हो अदाकारी से बचिए
हर एक सूरत भली लगती है कुछ दिन
लहू की शोब्दा -कारी से बचिए
शराफत आदमियत दर्द मंदी
बड़े शहरों में बीमारी से बचिए
ज़रूरी क्या हर एक महफ़िल में आना
तकल्लुफ की रवादारी से बचिए
बिना पैरों के सर चलते नहीं हैं
बुजुर्गों की समझदारी से बचिए